स्कूल जाने से पहले टिफिन में क्या ले जाना है, बेटे से रोज़ाना इसी बात पर बहस होती है

स्कूल जाने से पहले टिफिन में क्या ले जाना है, बेटे से रोज़ाना इसी बात पर बहस होती है

आप रोज़ाना पराठे ही पैक कर देती हो, मै बोर हो गया रोज़ाना पराठे खा खा के.... स्कूल बस जाने के बाद बस स्टाप पर खड़ी मिसेज़ शर्मा ने मिसेज़ कपूर को अपने घर में रोज़ाना होने वाली बहस के बारे में महज़ बताया ही था कि मिसेज़ कपूर तो बस फट ही पड़ी ... अरे क्या बताऊं मिसेज़ शर्मा हर घर की कुछ ऐसी ही कहानी है, पता नहीं आज कल के ये बच्चे किस मिट्टी के बने हैं, बोर बड़ी जल्दी हो जाते हैं । अब कहां से लाऊं रोज़ाना नयी नयी रेस्पी... मेरी माही तो कह रही थी मम्मी आपको तो न कुछ बनाना ही नहीं आता है रोज़ाना या तो पराठा दे दोगी या फिर सैंडबिच ... मेरी पार्टनर छवि की मम्मी से कुछ सीखो रोज़ाना कितनी टेस्टी टेस्टी डिशेज़ लेकर आती है वो ..
दरअसल मिसेज़ कपूर ठीक ही कह रही थी आज ये हर घर की कहानी है और मसला सिर्फ खाने के टिफिन तक ही सीमित नहीं है ... क्लास में कौन किस ब्रांड की घड़ी पहनता है, पिछली पार्टी में कपड़े और

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जूते किसने कितने मंहगे पहने थे, किसके पापा के पास कौन सी कार है, छुट्टियों में कौन कहां घूमने गया बगैरहा बगैरहा...आज कल बच्चे अपने साथियों की हर बात को नोटिस करते हैं, खुद से तुलना करते हैं और फिर उससे भी महंगे और अच्छे प्रोडक्ट खरीदने और उनका दिखावा करने का दवाब पाल लेते हैं। अंग्रेज़ी में इसे ही पियर प्रेशर कहते हैं और कभी कभी इसके बहुत बड़े दुश्परिणाम देखने को मिलते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ बच्चे ही पियर प्रेशर के शिकार हैं ध्यान से देखो आप भी इसकी चपेट में आ चुके हो ... अब आप तो समझदार हो खुद को संभाल सकते हो लेकिन बच्चों को इस प्रेशर से कैसे बचाओगे...
देखो जी हम जिस समाज में रह रहे हैं न उसका ताना बाना ही कुछ ऐसा हो गया है कि ये सब तो होना ही है... इससे बचने का रास्ता तो सिर्फ एक ही नज़र आता है कि अपने बच्चों को समझदार बनाओ, कुछ दिन पहले यू ट्यूब पर एक शार्ट फिल्म देखी थी नाम था 'मासूम ख्वाहिशें' मुझे तो बहुत पसंद आयी, कुल आठ मिनट की फिल्म है और यहां उसका लिंक भी अटैच कर दिया है ... आप भी देखो और बच्चों को भी दिखाओ शायद कोई समाधान नज़र आ जाये ...

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